SURDAS KA PAD // BIHAR BOARD CLASS 12 HINDI // DIGANT POETRY CHAPTER-2

 

पाठ-2

पद
सूरदास

सूरदास का परिचय

👉जन्म : : 1478 (अनुमानित)
👉निधन : 1583
👉जन्म-स्थान  दिल्ली के निकट: 'सीही' नामक ग्राम ।
👉निवास स्थान  ब्रजक्षेत्र में क्रमशः : 'गऊघाट', वृंदावन एवं पारसोली ग्राम ।
👉शिक्षा : स्वाध्याय द्वारा ज्ञानार्जन, काव्य रचना एवं संगीत का विशद ज्ञान एवं अभ्यास । विशाल लोकज्ञान।
👉अभिरुचि : पर्यटन, सत्संग, कृष्णभक्ति एवं वैराग्य ।
👉दीक्षागुरु  : महाप्रभु वल्लभाचार्य  'शुद्धाद्वैतवाद' एवं 'पुष्टिमार्ग' की (भक्तिसाधना के प्रवर्तक प्रसिद्ध दार्शनिक, आचार्य एवं संत)
👉दीक्षाकाल : 1509-10 अनुमानित
👉विशेष : जन्म से अंधे अथवा बड़े होने पर दोनों आँखें जाती रहीं। मृदुल, विनम्र, निरभिमानी, भावुक और अंतर्मुखी स्वभाव के विरक्त महात्मा ।
👉कृतियाँ : प्रमुख रूप से 'सूरसागर', 'साहित्यलहरी' राधारसकेलि, सूरसारावली आदि । 'सूरसागर' कवि की विश्वप्रसिद्धि का प्रमुख आधार । इसकी रचना 'श्रीम‌द्भागवत' की पद्धति पर द्वादश स्कंधों में हुई है। गेय पदों का विशाल संग्रह ।

कविता का भावार्थ 

पद -1  

जागिए ब्रजराज कुंवर कंवल-कुसुम फूले।
कुमुद-वृंद संकुचित भए भुंग लता भूले॥

भावार्थ - यह पद भक्त कवि सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें वात्सल्य भाव (माँ का अपने बच्चे के प्रति प्रेम) प्रकट किया गया है। इसमें माता यशोदा अपने पुत्र कृष्ण को सुबह जगाने के लिए प्यार भरे शब्दों का प्रयोग कर रही हैं।
वह कहती हैं – "हे ब्रज के राजकुमार!  अब  जागिए। कमल के फूल खिल चुके हैं और कुमुद (रात में खिलने वाले फूल) मुरझा गए हैं।" (क्योंकि कुमुद का संबंध चंद्रमा से होता है, इसलिए वे रात में खिलते हैं और दिन में बंद हो जाते हैं।) भौंरे अब कमल पर मँडराने लगे हैं और बेलों से लिपटे हुए सोए हुए से लग रहे हैं।
इस पद में सूरदास जी ने अत्यंत कोमल और मधुर भाव से माता यशोदा के वात्सल्य को दर्शाया है, जो प्रेमपूर्वक नन्हे कृष्ण को जगाने का प्रयास कर रही हैं।

तमचूर खग रोर सुनह बोलत बनराई।
रांभति गो खरिकनि में, बछरा हित धाई॥

भावार्थ -यह पद भक्त कवि सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें वात्सल्य भाव को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया है। इसमें माता यशोदा अपने नन्हे कृष्ण को सुबह जगाने के लिए स्नेहपूर्वक कह रही हैं।
वह कहती हैं – "हे ब्रज के राजकुमार! अब उठिए। देखिए, सुबह हो गई है। मुर्गे बांग देने लगे हैं, जंगल में पक्षी चहचहाने लगे हैं और चारों ओर उनकी मीठी आवाजें गूँज रही हैं। गोशाला में गाएँ अपने बछड़ों के लिए रंभा रही हैं और दौड़-दौड़कर अपने बछड़ों की तलाश कर रही हैं।"
इस पद में सूरदास जी ने प्रकृति के माध्यम से सुबह के सुंदर दृश्य का वर्णन किया है और माता यशोदा के वात्सल्य को बहुत कोमलता से चित्रित किया है। यह दिखाता है कि माँ का प्रेम अपने बच्चे के लिए कितना गहरा और मधुर होता है।

विधु मलीन रवि प्रकास गावत नर नारी।
सूर स्याम प्रात उठौ, अंबुज-कर-धारी।।

भावार्थ - यह पद सूरदास जी के प्रसिद्ध ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें माता यशोदा अपने पुत्र कृष्ण को प्रेमपूर्वक सुबह जगाने का प्रयास कर रही हैं।
वह कहती हैं – "हे ब्रज के राजकुमार! अब जागिए। रात समाप्त हो गई है, चंद्रमा का प्रकाश फीका पड़ गया है और सूर्य अपनी किरणों से जगत को रोशन कर रहा है। नर-नारी प्रातःकालीन भजन और मंगलगीत गा रहे हैं। इसलिए, हे श्यामसुंदर! अब उठ जाइए।"
सूरदास जी आगे बताते हैं कि माता यशोदा अत्यंत स्नेह और मनुहार से अपने लाडले श्रीकृष्ण को जगाने की कोशिश कर रही हैं। वे कहती हैं, "हे कमल-हस्त धारी श्रीकृष्ण! अब सोना छोड़कर उठो।"
इस पद में सूरदास जी ने वात्सल्य भाव का सुंदर चित्रण किया है, जहाँ एक माँ अपने बेटे को जगाने के लिए कितने प्रेम और अपनत्व से उसे पुकार रही है। साथ ही, इस दृश्य में प्रकृति का सुंदर वर्णन भी है, जहाँ रात्रि के जाने और प्रातःकाल के आगमन को बहुत ही कोमल भावों के साथ दर्शाया गया है।

पद -2

जेवत स्याम नंद की कनियाँ।
कछुक खात, कछु धरनि गिरावत, छबि निरखति नंद-रनियाँ।

भावार्थ - यह पद सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें वात्सल्य भाव का सुंदर चित्रण किया गया है। इसमें बालकृष्ण की भोली-भाली चेष्टाओं का बहुत ही मधुर वर्णन किया गया है।
इसमें बताया गया है कि नन्हे कृष्ण अपने पिता नंद बाबा की गोद में बैठकर भोजन कर रहे हैं। वे अपनी बालसुलभ चंचलता से कुछ भोजन खा रहे हैं, तो कुछ नीचे गिरा रहे हैं। यह प्यारा और मनमोहक दृश्य देखकर माँ यशोदा अपार प्रेम से उन्हें निहार रही हैं।
इस पद में सूरदास जी ने माँ-बाप के वात्सल्य और बालकृष्ण की अद्भुत लीलाओं को अत्यंत कोमलता से प्रस्तुत किया है। छोटे बच्चों की स्वाभाविक चंचलता और उनके क्रियाकलापों में छिपी सरलता को दर्शाने के साथ-साथ माता-पिता के स्नेह को भी बहुत सुंदरता से व्यक्त किया गया है।

बरी, बरा बेसन, बहु भाँतिनि, व्यंजन बिविध, अंगनियाँ।
डारत, खात, लेत, अपनैं कर, रुचि मानत दधि दोनियाँ।।

भावार्थ -  यह पद सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें माता-पिता के स्नेह और बालकृष्ण की भोली चेष्टाओं का सुंदर वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि नन्हे श्रीकृष्ण नंद बाबा की गोद में बैठे हुए भोजन कर रहे हैं।
माँ यशोदा ने कई प्रकार के व्यंजन बनाए हैं, जैसे बेसन के बाड़े, बरियाँ और अन्य स्वादिष्ट पकवान। लेकिन बालकृष्ण अपनी चंचलता में कुछ खाते हैं, कुछ नीचे गिरा देते हैं और कुछ हाथ में पकड़कर खेलते हैं।
हालाँकि, इतने सारे व्यंजनों के बीच भी उनकी सबसे अधिक रुचि दही के पात्र (मटके) में ही होती है। वे बड़े प्रेम से दही खाने में मग्न हैं, जिससे उनकी स्वाभाविक बाल-लीला का मनोहर दृश्य बन जाता है।
इस पद में सूरदास जी ने वात्सल्य भाव को बहुत ही कोमलता और सजीवता से चित्रित किया है। यह दिखाता है कि माता-पिता अपने बच्चे की हर छोटी-छोटी हरकत में आनंद पाते हैं, और बालकृष्ण अपनी चंचलता से सभी को मोहित कर देते हैं।

मिस्री, दधि माखन मिस्रीत करि, मुख नावत छबि धनियाँ।
आपुन खात, नंद-मुख नावत, सो छबि कहत न बानियाँ।।

भावार्थ - यह पद सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें माता-पिता के प्रेम और बालकृष्ण की बाल-सुलभ चेष्टाओं का सुंदर चित्रण किया गया है।
इसमें बताया गया है कि बालकृष्ण नंद बाबा की गोद में बैठकर भोजन कर रहे हैं। उन्हें मिश्री, दही और मक्खन बहुत प्रिय हैं, इसलिए वे इन तीनों को मिलाकर बड़े आनंद से खाते हैं।
माँ यशोदा यह मनमोहक दृश्य देखकर अपने आपको धन्य मानती हैं और अपार स्नेह से भर जाती हैं। बालकृष्ण की भोली-भाली चेष्टाएँ इतनी अद्भुत हैं कि वे खुद भी खाते हैं और अपने पिता नंद जी के मुख में भी डालते हैं।
सूरदास जी कहते हैं कि इस अनुपम छवि का वर्णन शब्दों में करना संभव नहीं है, क्योंकि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ अनंत और अवर्णनीय हैं।
इस पद में वात्सल्य रस अपनी पराकाष्ठा पर है। इसमें नन्हे कृष्ण की सरलता, उनकी खेल-खिलवाड़ वाली प्रवृत्ति और माता-पिता के अपार स्नेह का सुंदर समावेश किया गया है।

जो रस नंद-जसोदा बिलसत, सो नहि तिहू भुवनियाँ।
भोजन करि नंद अचमन लीन्हौ, मांगत सूर जुठनियाँ।।

भावार्थ - यह पद सूरदास जी के ग्रंथ 'सुरसागर' से लिया गया है, जिसमें माता-पिता के स्नेह और बालकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है।
सूरदास जी कहते हैं कि नंद बाबा और यशोदा जी को जो आनंद अपने लाडले श्रीकृष्ण को गोद में बैठाकर भोजन कराते समय मिल रहा है, वैसा सुख तीनों लोकों में किसी को भी प्राप्त नहीं हो सकता। यह आनंद दिव्य, अनुपम और दुर्लभ है।
भोजन के पश्चात नंद बाबा और श्रीकृष्ण कुल्ला (अचमन) करते हैं। इस दृश्य की भक्ति में लीन होकर सूरदास जी स्वयं कहते हैं कि "हे प्रभु! मुझे भी आपका जूठन (प्रसाद) मिल जाए।"
इस पद में वात्सल्य रस का चरम रूप देखने को मिलता है। इसमें माता-पिता के प्रेम और उनके लिए श्रीकृष्ण के अप्रतिम महत्व को दर्शाया गया है। साथ ही, सूरदास जी की गहरी भक्ति और विनम्रता भी झलकती है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जूठन को भी प्रभु का प्रसाद मानकर पाने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

OBJECTIVE QUESTION

1.         सूर का जन्म कब माना जाता है ?
(a) 1478                       
(b) 1480
(c) 1482                       
(d) 1493

2.         सूरदास की अभिरुचि किसमें थी?
(a)पर्यटन                         
(b)गायन
(c)
नृत्य                           
(d)
लेखन

3.         ब्रजक्षेत्र के किस ग्राम में सूर अधिक रहे थे ?
(a) बारदोली                    
(b) रूपहली
(c) पारसोली                    
(d) मनिकभता

4.         सूर किस काव्यधारा के कवि थे ?
(a) सन्त काव्यधारा            
(b) कृष्ण भक्ति काव्यधारा
(b) भक्ति काव्यधारा           
(d) हास्य काव्यधारा

5.         सूर की भक्ति किस रीति की थी?
(a) हास्य भाव                  
(b) माधुर्य भाव
(c) सख्य भाव                  
(d)वात्सल्य भाव

6.         ' जो रस नन्द जसोदा विलसत ' वह कहाँ नहीं है ?
(a) गोकुल में                    
(b) तीनों लोकों में
(c) वृन्दावन में                  
(d) मथुरा में

7.         सूर काव्य का कौन - सा अंश हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि के रूप में स्वीकृत है ?
(a) वात्सल्य भाव              
(b) विनय - पद
(c) गोपी विरह                  
(d) भ्रमरगीत

8.         सूरदास किस भक्ति के कवि हैं?
(a)कृष्ण भक्ति                  
(b)राम भक्ति
(c)
देश भक्ति                     
(d)
मत्री भक्ति

9.         इनमें से सूरदास की कौन सी रचना है?
(a)कड़बक                      
(
b)छप्पय 
(c)पद                             
(d)पुत्र-वियोग

10.     सूरदास के गुरु कौन थे?
(a)महाप्रभु वल्लभाचार्य      
(b)महावीर गौतम बुद्ध 
(c)महाप्रभु चैतन्य              
(
d)महाप्रभु महावीर स्वामी

11.     साहित्य लहरी के रचनाकार कौन है?
a)नंददास                         
(b)
सूरदास
c)नाभादास                      
(d)
तुलसीदास

12.     सूरदास हिंदी साहित्य के किस काल के कवि हैं?
(a)भक्ति काल                  
(b)
आधुनिक काल
(c)
आदिकाल                  
(d)
मध्यकालीन  

13.     सूरदास के काव्य की भाषा कौन सी है?
(a)ब्रज भाषा                    
(b)अवधी भाषा 
(c)उर्दू भाषा                     
(
d)हिंदी भाषा 

14.     सूरदास का जन्म स्थान कौन सा है?
(a)दिल्ली के निकट सीही नामक ग्राम
(b)बनारस के निकट लमही ग्राम
(c)
दरभंगा के निकट बेनीपुर ग्राम
(d)
इनमें से कोई नहीं

15.     ब्रज भाषा के प्रारंभिक कवि का नाम बताइए|
(a)तुलसीदास                   
(b)
सूरदास
(c)नाभादास                     
(d)
मलिक मोहम्मद जायसी

16.     सूरदास का निधन कब हुआ था?
(a)1581                        
(b)1582
(c)1583                        
(d)1584

17.     ब्रज भाषा की विशेषता क्या है?
(a)कोमलता                     
(b)लालित्य
(c)माधुर्य                         
(d)इनमे सभी

18.     सूरदास के पद किस पुस्तक से लिया गया है?
(a)सूरसागर                      
(b)साहित्य लहरी
(c)सर सारावली               
(d)इनमे से कोई नहीं

19.     सूरदास जी का प्रस्तुत पद किस ग्रंथ से लिया गया है?
(a) रामचरितमानस             
(b)
गीत गोविंद
(c)
सूरसागर                     
(d) महाभारत

20.     "कुमुद-वृंद संकुचित भए" पंक्ति में कुमुद किस समय खिलता है?
(a) दिन में                        
(b)
रात में
(c)
संध्या के समय              
(d)
प्रातःकाल

21.     माता यशोदा श्रीकृष्ण को किस तरह जगाने का प्रयास कर रही हैं?
(a) कठोर शब्दों से
(b)
प्यार भरे शब्दों से
(c) भय दिखाकर
(d)
संगीत गाकर

22.     तमचूर खग रोर सुनह...” इस पद में किसका उल्लेख किया गया है, जो सुबह होने का संकेत देता है?
(a) सूर्य की किरणें
(b)
पक्षियों का कलरव
(c)
मुर्गे की बांग
(d) उपरोक्त सभी

23.     "रांभति गो खरिकनि में" का क्या अर्थ है?
(a) गाएँ सो रही हैं
(b)
गाएँ अपने बछड़ों के लिए रंभा रही हैं
(c) गाएँ चर रही हैं
(d)
गाएँ दूध दे रही हैं

24.     "विधु मलीन" का अर्थ क्या है?
(a) सूर्य का प्रकाश तेज हो गया है
(b)
चंद्रमा की चमक फीकी पड़ गई है
(c) बारिश शुरू हो गई है
(d)
आकाश में बादल छा गए हैं

25.     "सूर स्याम प्रात उठौ" में "स्याम" किसका संकेत है?
(a) श्रीराम                        
(b)
श्रीकृष्ण
(c) अर्जुन                        
(d)
भीम

26.     श्रीकृष्ण किसकी गोद में बैठकर भोजन कर रहे हैं?
(a) माता यशोदा                
(b)
नंद बाबा
(c) बलराम                      
(d)
राधा

27.     श्रीकृष्ण भोजन करते समय क्या कर रहे हैं?
(a) ध्यान लगा रहे हैं
(b)
पूरी तरह भोजन कर रहे हैं
(c)
कुछ खाते हैं, कुछ नीचे गिराते हैं
(d) किसी और को भोजन करा रहे हैं

28.     श्रीकृष्ण को खाने में सबसे अधिक रुचि किसमें होती है?
(a) मिठाइयों में                  
(b)
फलों में
(c)
दही के पात्र में              
(d) रोटियों में

29.     भोजन के बाद श्रीकृष्ण और नंद बाबा क्या करते हैं?
(a) खेलते हैं
(b)
मंदिर जाते हैं
(c)
अचमन (कुल्ला) करते हैं
(d) विश्राम करते हैं

30.     सूरदास जी इस पद में क्या माँग रहे हैं?
(a) श्रीकृष्ण का प्रेम
(b)
श्रीकृष्ण के जूठन का प्रसाद
(c) माता यशोदा की सेवा
(d)
गोकुल में निवास करने का अवसर

SHORT QUESTION

1.         प्रथम पद में किस रस की व्यंजना हुई है?
उत्तर - सूरदास रचित प्रथम पद में वात्सल्य रस की अभिव्यक्ति हुई है। इसमें माँ यशोदा कोमल एवं मधुर शब्दों में बालकृष्ण को जगाती हैं। यह वात्सल्य रस का सुंदर उदाहरण है, जो पाठक को आनंद एवं तन्मयता से भर देता है।

2.         गायें किस ओर दौड़ पड़ी?
उत्तर - प्रथम पद में प्रातःकालीन दृश्य का वर्णन है, जिसमें गायें अपने बछड़ों को दूध पिलाने के लिए गौशाला से दौड़ पड़ती हैं। पक्षियों का कलरव, कमल का खिलना और मुर्गे की बांग सुबह होने का संकेत देते हैं।

3.         सूरदास के वात्सल्य वर्णन की विशेषता लिखिए।
उत्तर - सूरदास का वात्सल्य वर्णन अत्यंत मनोवैज्ञानिक, कोमल और सजीव है। इसमें बालकृष्ण की चेष्टाओं का मार्मिक चित्रण हुआ है। माता यशोदा पुत्र को जगाने, खिलाने और देखभाल करने में आनंद अनुभव करती हैं, जिससे मातृस्नेह की गहरी अभिव्यक्ति होती है।

4.          कृष्ण खाते समय क्या-क्या करते हैं?
उत्तर - कृष्ण नंद बाबा की गोद में बैठे भोजन कर रहे हैं। वे कुछ खाते, कुछ गिराते और कुछ हाथ में पकड़कर खेलते हैं। विभिन्न व्यंजनों में से उन्हें दही सबसे प्रिय है। वे मिश्री, दही और मक्खन मिलाकर खाते हैं, जिससे उनकी बाल-सुलभ चेष्टाएँ मनमोहक लगती हैं।

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