निबंध लेखन
निबंध लेखन एक साहित्यिक विधा है,
जिसमें किसी विषय पर सुव्यवस्थित,
तार्किक और प्रभावशाली ढंग से
विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। यह लेखन शैली न केवल भाषा-शैली और विचार अभिव्यक्ति को सशक्त
बनाती है, बल्कि विषय की गहराई को समझने और प्रस्तुत करने की क्षमता भी विकसित करती है।
निबंध के प्रकार
1.
कथात्मक निबंध (कहानी या घटना-आधारित निबंध)- इस निबंध में किसी घटना,
अनुभव या कहानी को रोचक और
क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। यह निबंध किसी व्यक्ति के निजी अनुभवों या
ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित हो सकता है।
उदाहरण:
- मेरी पहली रेलयात्रा
- बचपन की यादें
2.
वर्णनात्मक निबंध (किसी
वस्तु, स्थान, व्यक्ति या भावना का विस्तृत वर्णन)-
इस निबंध में किसी व्यक्ति,
स्थान,
वस्तु या भावना का विस्तृत विवरण
दिया जाता है, जिससे
पाठक के मन में स्पष्ट चित्र उभर सके।
उदाहरण:
- गंगा नदी का महत्व
- ताजमहल का सौंदर्य
3.
व्याख्यात्मक निबंध (तथ्यों
और तर्कों पर आधारित निबंध)-इसमें किसी
विषय की व्याख्या गहराई से की जाती है। इसमें लेखक अपने विचारों को तथ्यों,
उदाहरणों और प्रमाणों के आधार पर
प्रस्तुत करता है।
उदाहरण:
- शिक्षा का महत्व
- पर्यावरण संरक्षण के उपाय
4.
तर्कपूर्ण निबंध (पाठक
को प्रभावित करने वाला निबंध)- इस निबंध में
लेखक अपने विचारों को प्रमाणों और तर्कों के साथ प्रस्तुत करता है,
ताकि पाठक उसकी राय से सहमत हो
जाए।
उदाहरण:
- स्वच्छता अपनाने की आवश्यकता
- जल संरक्षण क्यों जरूरी है?
5.
वाद-विवादात्मक निबंध (पक्ष और विपक्ष दोनों तर्कों पर आधारित निबंध)- इस प्रकार के निबंध में किसी विषय के पक्ष और विपक्ष में
तर्क प्रस्तुत किए जाते हैं और अंत में निष्कर्ष दिया जाता है।
उदाहरण:
- मोबाइल फोन: वरदान या अभिशाप?
- ऑनलाइन शिक्षा बनाम पारंपरिक
शिक्षा
निबंध की संरचना
1.
प्रस्तावना
- इसमें विषय की संक्षिप्त जानकारी दी जाती है।
- विषय का उद्देश्य स्पष्ट किया जाता है।
- पाठक को निबंध पढ़ने के लिए आकर्षित करने का प्रयास
किया जाता है।
2. मुख्य भाग
- इसमें विषय की विस्तृत चर्चा
की जाती है।
- हर अनुच्छेद में एक मुख्य
बिंदु (विचार) होता है।
- तर्कों, उदाहरणों और प्रमाणों के साथ
विषय को स्पष्ट किया जाता है।
3. निष्कर्ष
- पूरे निबंध का सार प्रस्तुत
किया जाता है।
- मुख्य बिंदुओं को दोहराया
जाता है।
- अंतिम निष्कर्ष या राय दी
जाती है।
निबंध लेखन के नियम
👉स्पष्ट संरचना रखें: निबंध को सही क्रम में लिखें – प्रस्तावना, मुख्य भाग और निष्कर्ष।
👉विषय से जुड़े रहें: विषय से भटकने से बचें और तर्कसंगत ढंग से विचार
प्रस्तुत करें।
👉सरल और शुद्ध हिंदी का प्रयोग करें: कठिन और क्लिष्ट शब्दों से बचें तथा भाषा को प्रभावी
बनाएं।
👉शुद्ध व्याकरण का प्रयोग करें: सही मात्रा चिन्हों, विराम चिह्नों और व्याकरण का ध्यान रखें।
👉संदर्भ और उदाहरण दें: निबंध में दिए गए विचारों को प्रमाणित करने के लिए
उदाहरणों और तथ्यों का प्रयोग करें।
👉रचनात्मकता बनाए रखें: निबंध को रोचक और प्रवाहमयी बनाने के लिए सुंदर भाषा-शैली
और रचनात्मकता का समावेश करें।
👉दोहराव से बचें: एक ही बात को बार-बार दोहराने से निबंध नीरस लग सकता
है।
1. मेरे प्रिय लेखक – मुंशी प्रेमचंद पर निबंध
हिन्दी साहित्य के महान कथाकार
मुंशी प्रेमचंद मेरे प्रिय लेखक हैं। उनकी रचनाएँ समाज की सच्चाई को उजागर करने के
साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को गहराई से प्रस्तुत करती हैं। उनकी
लेखनी ने पाठकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि सामाजिक सुधार का संदेश भी दिया।
प्रेमचंद का जन्म 1880
ई.
में वाराणसी के लमही गाँव में हुआ
था। उनका प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों से भरा था। मात्र सात वर्ष की आयु में माता का
निधन हो गया और चौदह वर्ष की आयु में पिता भी चल बसे। जीवन संघर्षों से भरा रहा, फिर भी उन्होंने शिक्षा प्राप्त की
और साहित्य की ओर रुख किया।
प्रेमचंद ने अपने लेखन की शुरुआत उर्दू भाषा में की और
नवाबराय नाम से लिखते थे। 1910 में उनकी कृति सोज़े-वतन जब्त कर ली गई, जिसके बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर प्रेमचंद रख लिया और
हिन्दी में लिखना शुरू किया। उनकी रचनाएँ सामाजिक कुरीतियों,
गरीबी,
शोषण और मानव मूल्यों पर आधारित
हैं। उनके प्रमुख उपन्यासों में गबन, गोदान, कर्मभूमि और सेवासदन शामिल हैं। वहीं, पंच परमेश्वर,
ईदगाह
और
पूस की रात
जैसी कहानियाँ भी बहुत प्रसिद्ध
हैं।
1936 में गंभीर बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। उनकी अंतिम
कृति मंगलसूत्र अधूरी रह गई, जिसे उनके पुत्र अमृतराय ने पूरा किया। प्रेमचंद ने साहित्य को यथार्थवादी
दिशा दी और समाज को नई दृष्टि प्रदान की, इसलिए वे सदैव मेरे प्रिय लेखक रहेंगे।
2. मेरा प्रिय खेल – फुटबॉल पर निबंध
हर किसी की अपनी पसंद होती है,
कोई क्रिकेट पसंद करता है तो कोई
टेनिस। लेकिन मुझे सबसे अधिक फुटबॉल पसंद है। यह कम खर्चीला,
रोमांचक और तेज़ गति वाला खेल है,
जिसे कोई भी आसानी से खेल सकता है।
फुटबॉल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। जहां क्रिकेट
और टेनिस के लिए महंगे उपकरण व विशेष मैदान की जरूरत होती है,
वहीं फुटबॉल के लिए बस एक गेंद और
मैदान चाहिए। इसे अकेले भी खेला जा सकता है।
यह खेल 90 मिनट में पूरा हो जाता है और इसकी तेज़ गति इसे बेहद रोमांचक
बनाती है। मैच शुरू होते ही खिलाड़ी जोश से भर जाते हैं,
और दर्शक भी आखिरी सीटी तक रोमांच
में डूबे रहते हैं। इसके अलावा, यह सुरक्षित खेल है क्योंकि इसमें क्रिकेट या हॉकी जैसी चोट
का खतरा कम होता है।
कम खर्च, कम समय और अधिक आनंद देने के कारण फुटबॉल मेरा प्रिय खेल
है। यह न केवल मनोरंजन देता है, बल्कि शरीर को चुस्त-दुरुस्त भी रखता है। यही कारण है
कि यह दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है।
3. समय का महत्व पर निबंध
समय हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण
हिस्सा है, जो बिना रुके निरंतर आगे बढ़ता रहता है। यह एक ऐसा धन है,
जिसे न खरीदा जा सकता है और न ही
वापस लाया जा सकता है। यदि हम समय का सही उपयोग करें,
तो सफलता निश्चित है,
लेकिन यदि इसे व्यर्थ गंवा दें,
तो जीवन में केवल पछतावा ही हाथ
लगता है।
समय की शक्ति अपार होती है। यह एक आलसी व्यक्ति को बर्बाद
कर सकता है और मेहनती व्यक्ति को ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। इतिहास गवाह है कि
जिन्होंने समय की कीमत समझी, वे महान बने, जबकि जिन्होंने इसे अनदेखा किया,
वे पीछे रह गए। समय की यही विशेषता
है कि यह किसी के लिए नहीं रुकता और सभी के लिए समान रूप से चलता है।
हमें अपने जीवन में समय का सदुपयोग करना चाहिए। प्रत्येक
क्षण अनमोल होता है, और यदि हम इसे सही दिशा में लगाएँ, तो हम सफलता, खुशी और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। एक प्रसिद्ध कहावत है—"यदि हम समय को
बर्बाद करेंगे, तो समय हमें बर्बाद कर देगा।" इसलिए, हमें नियमितता, अनुशासन और मेहनत के साथ समय का सही प्रबंधन करना चाहिए,
ताकि हम अपने जीवन को सफल बना
सकें।
4.
राष्ट्रीय एकता पर निबंध
भारत विविधता में एकता का सबसे
सुंदर उदाहरण है। यहाँ विभिन्न धर्म, जातियाँ, भाषाएँ और संस्कृतियाँ होते हुए भी लोग एक साथ रहते हैं।
राष्ट्रीय एकता केवल देश की अखंडता के लिए ही नहीं,
बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक विकास
के लिए भी आवश्यक है।
भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिवस,
19 नवंबर,
को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही, 19 से 25 नवंबर तक ‘राष्ट्रीय एकीकरण सप्ताह’ भी मनाया जाता है, जिससे लोगों को राष्ट्रीय एकता के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सके।
भारत में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी, जैन आदि विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। अकेले हिंदू धर्म
में ही कई मत और परंपराएँ पाई जाती हैं। भाषा और संस्कृति की दृष्टि से भी यह देश
अत्यंत विविध है। लेकिन इन भिन्नताओं के बावजूद,
एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति
है।
राष्ट्रीय एकता से समाज में प्रेम,
सौहार्द और सहयोग बढ़ता है। यदि हम
एकजुट रहेंगे, तो कोई भी आंतरिक या बाहरी शक्ति हमें विभाजित नहीं कर सकती। हमें,
विशेषकर युवाओं को,
इस एकता को बनाए रखना है,
ताकि हमारा देश और अधिक सशक्त और
विकसित बन सके।
5.
विज्ञान : वरदान या अभिशाप पर निबंध
वर्तमान युग को वैज्ञानिक युग कहा
जाता है। विज्ञान ने हमारे जीवन को अनेक सुविधाएँ दी हैं,
लेकिन इसका दुरुपयोग विनाशकारी भी
हो सकता है। यह हमारे लिए वरदान भी है और अभिशाप भी।
विज्ञान : वरदान
विज्ञान ने जीवन को सरल और सुखमय
बना दिया है। मशीनों और उपकरणों ने श्रम कम कर दिया है। कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टर,
उन्नत बीज और कीटनाशक दवाइयों ने
उत्पादन बढ़ाया है। चिकित्सा के क्षेत्र में एक्स-रे, सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी तकनीकों ने असाध्य रोगों
पर विजय प्राप्त की है। परिवहन और संचार में विज्ञान ने अद्भुत प्रगति की है—रेल, हवाई जहाज और इंटरनेट ने दुनिया को जोड़ दिया है। मनोरंजन और शिक्षा के
क्षेत्र में भी विज्ञान की देन अमूल्य है।
विज्ञान : अभिशाप
जहाँ विज्ञान ने सुखद बदलाव लाए
हैं, वहीं इसका विध्वंसकारी रूप भी सामने आया है। विनाशकारी हथियारों ने विश्व को
युद्ध की दहलीज पर ला खड़ा किया है। हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले इसके
उदाहरण हैं। औद्योगिक विकास ने पर्यावरण को दूषित कर दिया है। मशीनों ने श्रम का
महत्व घटा दिया है, जिससे बेरोजगारी बढ़ी है।
निष्कर्ष
विज्ञान का उपयोग यदि सही दिशा में
किया जाए तो यह वरदान है, अन्यथा यह विनाशकारी अभिशाप बन सकता है। हमें इसे मानवता की
भलाई के लिए प्रयोग करना चाहिए।
6.
गाँव का जीवन पर निबंध
गाँव का जीवन प्राकृतिक सुंदरता और
सादगी से भरा होता है। यहाँ के लोग ज्यादातर कृषि कार्यों में संलग्न रहते हैं और
शहरों की भागदौड़ से दूर शांत जीवन व्यतीत करते हैं।
गाँव में दिन की शुरुआत बहुत जल्दी होती है। लोग प्रातः काल
सूर्योदय से पहले उठते हैं और अपने कार्यों में लग जाते हैं। किसान अपने खेतों में
जाते हैं, जहाँ वे हल चलाने, फसल बोने और सिंचाई जैसे कार्य करते हैं। अधिकतर किसान या तो अपने खेतों में
काम करते हैं या जमींदारों के खेतों में मजदूरी करते हैं। महिलाओं का दिन घर के
कामों में व्यस्त रहता है। वे भोजन बनाती हैं,
घर की सफाई करती हैं और पशुओं की
देखभाल करती हैं।
गाँवों में परिवहन के साधन सीमित
होते हैं। लोग अधिकतर साइकिल या बैलगाड़ी का उपयोग करते हैं,
जिससे यहाँ प्रदूषण भी कम होता है।
बच्चे पास के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। दोपहर में किसान खेतों में ही भोजन कर
लेते हैं या घर लौटते हैं।
शहरों की तुलना में गाँवों का जीवन शांतिपूर्ण होता है।
यहाँ का वातावरण स्वच्छ होता है, लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और आपसी
प्रेम बना रहता है। हालाँकि, गाँवों में कई सुविधाओं की कमी भी होती है,
फिर भी यहाँ का जीवन आनंदमय और
आत्मीयता से भरा होता है।
7.
आतंकवाद पर निबंध
आतंकवाद एक गंभीर वैश्विक समस्या
है, जो मानवता के लिए खतरा बन चुका है। यह हिंसा और भय का सहारा लेकर समाज में
अस्थिरता फैलाता है। आतंकवादी समूह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्दोष
लोगों पर हमले करते हैं, जिससे देश की शांति और विकास प्रभावित होता है।
आतंकवाद के पीछे कई कारण होते हैं,
जिनमें राजनीतिक अस्थिरता,
सामाजिक अन्याय,
धार्मिक कट्टरता और आर्थिक विषमता
प्रमुख हैं। कई युवा गुमराह होकर आतंकवादी संगठनों में शामिल हो जाते हैं,
जहाँ उन्हें भड़काया जाता है और
हिंसा के लिए प्रेरित किया जाता है। आतंकवादी गतिविधियाँ देश को वर्षों पीछे धकेल
देती हैं और विकास कार्यों में बाधा डालती हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकारों को कड़ी नीतियाँ अपनानी
चाहिए। खुफिया तंत्र को मजबूत करना, आतंकवादियों को आर्थिक सहायता रोकना और समाज में जागरूकता
फैलाना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आतंकवाद के खात्मे में सहायक हो सकता है।
आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए शिक्षा,
रोजगार और सामाजिक समरसता को
बढ़ावा देना आवश्यक है। आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर ही हम अपने देश और दुनिया
को सुरक्षित बना सकते हैं।
8.
वसंत ऋतु पर निबंध
वसंत ऋतु भारत में सबसे सुहावना और
मनमोहक मौसम माना जाता है। यह सर्दियों के बाद और गर्मियों से पहले,
मार्च से मई के बीच आती है। इस ऋतु
में प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती है। पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं,
फूल खिलते हैं,
और वातावरण में ताजगी छा जाती है।
वसंत के आगमन के साथ ही कोयल की मधुर आवाज गूंजने लगती है
और खेतों में फसलें पकने लगती हैं। सरसों के पीले फूल खेतों को सुनहरे रंग से भर
देते हैं। हवा में भीनी-भीनी खुशबू और हल्की ठंडक होती है, जो मन को आनंदित कर देती है।
नदियों का पानी कलकल करता है, पक्षी प्रसन्नता से चहचहाने लगते हैं और हरियाली चारों ओर
बिखर जाती है।
इस मौसम की सौंदर्यपूर्ण छटा मनुष्य के भीतर उत्साह भर देती
है। किसानों के लिए यह समय विशेष महत्व रखता है,
क्योंकि उनकी फसलें पककर तैयार हो
जाती हैं। चाँदनी रातें भी शांत और सुकून देने वाली होती हैं।
वसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता है,
क्योंकि यह प्रकृति में नवजीवन का
संचार करता है। यह ऋतु केवल बाहरी सौंदर्य ही नहीं,
बल्कि मानसिक ताजगी और नई ऊर्जा का
संचार भी करती है, जिससे मनुष्य आत्मविश्वास से भर जाता है।
9.
नारी शिक्षा पर निबंध
भारतीय समाज के आर्थिक और सामाजिक
विकास के लिए नारी शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। पुरुष और महिला समाज के दो महत्वपूर्ण
आधार हैं, जिनके समान विकास के बिना प्रगति असंभव है। जैसे साइकिल के दोनों पहियों का
संतुलन जरूरी होता है, वैसे ही समाज की उन्नति के लिए महिलाओं की शिक्षा आवश्यक है।
शिक्षित महिला परिवार,
समाज और देश के विकास में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वह अपने बच्चों की पहली शिक्षक होती है और उन्हें
नैतिकता, संस्कृति और ज्ञान का मार्ग दिखाती है। यदि महिलाएँ अशिक्षित रहेंगी,
तो समाज कमजोर हो जाएगा और आने
वाली पीढ़ियाँ भी सशक्त नहीं बन पाएंगी।
महिला शिक्षा केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र की
प्रगति में सहायक होती है। शिक्षित महिलाएँ न केवल अपने परिवार को सशक्त बनाती हैं,
बल्कि सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र
में भी योगदान देती हैं। एक पुरुष को शिक्षित करने से केवल एक व्यक्ति शिक्षित
होता है, जबकि एक महिला शिक्षित होकर पूरे परिवार को शिक्षित कर सकती है।
आज भारत महिला साक्षरता के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर
रहा है। इतिहास में गार्गी, मैत्रेयी, रानी लक्ष्मीबाई जैसी अनेक महिलाओं ने शिक्षा और समाज सेवा
में योगदान दिया। इसलिए, महिलाओं को शिक्षा का अधिकार देना ही समाज की वास्तविक
प्रगति का संकेत है।
10. प्रदूषण पर निबंध
पर्यावरण प्रदूषण आज के युग की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। यह एक
वैश्विक संकट है, जिससे सभी देश प्रभावित हो रहे हैं, चाहे
वे विकसित हों या विकासशील। प्रदूषण तब होता है जब मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण में
अवांछित तत्वों का संचार करती हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन
बिगड़ जाता है। प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को प्रदूषक कहा जाता है, जो प्राकृतिक भी हो सकते हैं या मानवीय हस्तक्षेप से निर्मित होते हैं।
प्रदूषण को मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया जाता है—
- वायु प्रदूषण – वाहनों,
कारखानों और जलने वाले ईंधनों से निकलने वाले धुएँ के कारण
वायुमंडल दूषित होता है।
- जल प्रदूषण – औद्योगिक
कचरे और घरेलू अपशिष्ट के जल स्रोतों में मिल जाने से जल प्रदूषित होता है।
- भूमि प्रदूषण – प्लास्टिक,
रसायनों और कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों के कारण मिट्टी
की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- ध्वनि प्रदूषण – अत्यधिक
शोर-शराबे से मानसिक तनाव और सुनने की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- रेडियोधर्मी प्रदूषण – परमाणु परीक्षणों और रेडियोधर्मी कचरे से पर्यावरण को गंभीर नुकसान
होता है।
- ऊष्मीय प्रदूषण – औद्योगिक
गतिविधियों से उत्पन्न गर्मी जल और वायु को प्रभावित करती है।
प्रदूषण के बढ़ने से जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की
हानि, नई बीमारियों का जन्म और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी
समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन और उनके पुनर्स्थापन
की धीमी गति प्रदूषण को और अधिक बढ़ावा देती है। इसलिए, प्रदूषण
नियंत्रण हेतु जागरूकता बढ़ानी चाहिए और हर स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए।
11.
भ्रष्टाचार पर निबंध
भ्रष्टाचार हमारे देश की एक गंभीर समस्या है, जो कई सदियों से
चली आ रही है और दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यह समाज की जड़ों को दीमक की तरह
खोखला कर रहा है और देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
जब कोई व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ प्राप्त करता है, तो इसे भ्रष्टाचार कहा जाता है।
भ्रष्टाचार के प्रमुख रूप:
- रिश्वतखोरी – पैसे या
उपहार लेकर अवैध कार्य करना।
- कालाबाजारी – आवश्यक
वस्तुओं की कीमतें बढ़ाकर अवैध लाभ कमाना।
- गबन – सरकारी या
सार्वजनिक धन का दुरुपयोग।
- राजनीतिक भ्रष्टाचार – चुनावों में अनैतिक तरीकों से सत्ता प्राप्त करना।
सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व्यापक रूप से फैला हुआ है, जिससे आम आदमी को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह न केवल देश की
आर्थिक प्रगति को बाधित करता है, बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों
के हक को भी छीन लेता है।
भ्रष्टाचार के
उन्मूलन के लिए आवश्यक है कि कठोर कानून बनाए जाएँ और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया
जाए। साथ ही, नागरिकों को भी जागरूक होकर अपने अधिकारों की
रक्षा करनी चाहिए और ईमानदारी को जीवन का मूलमंत्र बनाना चाहिए। यदि हम सभी मिलकर
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएँ, तो इसे जड़ से खत्म किया जा
सकता है।
12.
महंगाई
की समस्या पर निबंध
महंगाई एक गंभीर आर्थिक समस्या है, जो हर देश की
अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। यह आम आदमी के जीवन को कठिन बना देती है,
क्योंकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें निरंतर बढ़ती जा रही हैं। बीते
कुछ दशकों में महंगाई में भारी वृद्धि हुई है, जिससे मध्यम
वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों की परेशानियाँ बढ़ गई हैं।
महंगाई के प्रमुख कारण:
- जनसंख्या वृद्धि – मांग बढ़ने
से वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
- भ्रष्टाचार – काला
बाज़ारी और मुनाफाखोरी महंगाई को बढ़ावा देते हैं।
- अनुचित वितरण प्रणाली – आवश्यक वस्तुएँ समय पर लोगों तक नहीं पहुँचतीं।
- मांग और आपूर्ति में असंतुलन – वस्तुओं की कमी होने पर कीमतें बढ़ जाती हैं।
महंगाई के कारण गरीबों के लिए दो वक्त का भोजन भी कठिन हो गया है। किसानों और
व्यापारियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं। सरकारी कर्मचारियों की हड़तालें
और वेतन में बढ़ोतरी भी इस समस्या का पूर्ण समाधान नहीं कर पा रही हैं।
महंगाई को रोकने के उपाय:
- सरकार को गरीबों के लिए विशेष सहायता योजनाएँ लागू
करनी चाहिए।
- मुनाफाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी निगरानी
रखनी चाहिए।
- आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उत्पादन को
प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- आम जनता को जागरूक रहकर सरकारी नीतियों पर नजर रखनी
चाहिए।
यदि सरकार और जनता मिलकर प्रयास करें, तो महंगाई की
समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
13.
दहेज
प्रथा: एक सामाजिक अभिशाप पर निबंध
दहेज प्रथा भारतीय समाज में एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गई है। प्राचीन समय
में इसे बेटी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, क्योंकि उस समय बेटियों को पैतृक संपत्ति में अधिकार नहीं मिलता था।
माता-पिता अपनी बेटियों को आभूषण, नकदी और अन्य संपत्तियाँ
देकर उनका भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास करते थे।
दहेज प्रथा के दुष्परिणाम:
- महिलाओं पर अत्याचार – दहेज कम लाने पर कई महिलाओं को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी
पड़ती है।
- आर्थिक बोझ – गरीब
परिवारों के लिए यह एक बड़ा बोझ बन जाता है, जिससे कई
बार वे कर्ज में डूब जाते हैं।
- महिलाओं की असुरक्षा – कई बार दहेज की माँग पूरी न होने पर नवविवाहिताओं की हत्या या
आत्महत्या के मामले सामने आते हैं।
- लिंग भेदभाव – बेटियों को
बोझ समझकर कई लोग कन्या भ्रूण हत्या तक करने लगते हैं।
समाधान एवं रोकथाम:
- सख्त कानूनों का पालन – सरकार को दहेज निषेध कानून को और कठोरता से लागू करना चाहिए।
- सामाजिक जागरूकता – समाज में
महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहिए।
- मानसिकता में बदलाव – विवाह को
व्यापार न समझकर समानता और सम्मान का आधार बनाना चाहिए।
- दहेजमुक्त विवाह को बढ़ावा – बिना दहेज वाले विवाहों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा
सकता है। महिलाओं के आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए दहेज प्रथा को पूरी
तरह समाप्त करना आवश्यक है।
14. कोरोना वायरस: एक वैश्विक महामारी
परिचय:
कोरोना वायरस (COVID-19) एक संक्रामक बीमारी
है जो सार्स-कोव-2 वायरस के कारण होती है।
इसकी शुरुआत दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई और
धीरे-धीरे यह महामारी का रूप लेकर पूरी दुनिया में फैल गई।
संक्रमण के लक्षण:
- बुखार
- सूखी खांसी
- सांस लेने में कठिनाई
- गले में खराश और नाक बहना
- गंभीर मामलों में निमोनिया, किडनी फेल होना और मृत्यु तक हो सकती है।
संक्रमण का प्रसार:
यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से निकली बूंदों
(ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से फैलता है। संक्रमित सतहों को छूने के बाद जब कोई
व्यक्ति अपनी आँख, नाक या मुँह छूता है, तो उसे संक्रमण हो सकता है।
बचाव के उपाय:
- नियमित रूप से हाथ धोएं और सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
- खांसते या छींकते समय मुँह और नाक को रूमाल या टिश्यू
से ढकें।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें और सामाजिक दूरी बनाए
रखें।
- मास्क पहनें और बिना आवश्यकता घर से बाहर न निकलें।
- स्वस्थ आहार लें और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले
खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
संक्रमण की रोकथाम:
- संक्रमित व्यक्ति को 14 दिनों तक
आइसोलेट रहना चाहिए।
- सार्वजनिक परिवहन, कार्यालय और
भीड़-भाड़ वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें और अपने आसपास के वातावरण
को स्वच्छ रखें।
निष्कर्ष:
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है, लेकिन इससे बचाव के उपाय अपनाकर हम इस महामारी को नियंत्रित कर सकते हैं।
सावधानी और सतर्कता ही इस वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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