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Kavitt by Bhushan Class 12 Bihar Board | Summary, Objective & Question Answer

 

पाठ-5

कवित्त
भूषण

भूषण का परिचय

👉जन्म  : 1613
👉निधन : 1715
👉जन्मस्थान : तिकवापुर, कानपुर, उत्तरप्रदेश
👉पिता : रत्नाकर त्रिपाठी
👉उपनाम : चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रसाह ने इन्हें 'कवि भूषण' की उपाधि दी थी । आगे उपनाम भूषण इतना प्रसिद्ध हुआ कि मूलनाम विस्मृत हो गया ।
👉आश्रयदाता : छत्रपति शिवाजी, शिवाजी के पुत्र शाहजी और पन्ना के बुंदेला राजा छत्रसाल
👉विशेष :- रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि चिंतामणि त्रिपाठी और मतिराम भूषण के भाई के भाई के रूप में जाने जाते हैं।
👉कृतियाँ : शिवराज भूषण (384 छंदों में 105 अलंकारों का निरूपण और छत्रपति शिवाजी की प्रशस्ति करनेवाले मुक्तकों का संग्रह) । शिवा बावनी (52 मुक्तकों में छत्रपति शिवाजी की वीरता का बखान) । छत्रसाल दशक (10 छंदों में महाराज छत्रसाल की वीरता का यशोगान) । ये तीन कृतियाँ अप्राप्य हैं: भूषण हजारा, भूषण उल्लास, दूषण उल्लास । कुछ स्फुट पद्य भी प्राप्त होते हैं ।
👉यह एक वीर रस के कवि हैं।

KAVITT BY BHUSHAN


कवित्त का भावार्थ

(1)

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाड़व ज्यौं अंभ पर,
रावन सदंभ पर, रघुकुल राज है।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में छत्रपति शिवाजी के शौर्य का गुणगान करते हुए कहते हैं कि शिवाजी का पराक्रम शत्रुओं पर उसी तरह हावी है जैसे—
1. इंद्र का राक्षस जंभासुर पर,
2.
समुद्र में रहने वाली अग्नि (बाड़व अग्नि) का पानी पर,
3.
भगवान राम का घमंडी रावण पर।

इन सभी उदाहरणों से कवि यह बताना चाहते हैं कि शिवाजी मलेच्छ (विदेशी आक्रांताओं) पर पूरी तरह विजय प्राप्त कर चुके हैं, जैसे इन महाशक्तियों ने अपने-अपने शत्रुओं को पराजित किया था।

पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर,
ज्यौं सहस्रबाहू पर, राम द्विज राज है।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में छत्रपति शिवाजी के शौर्य की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि शिवाजी का पराक्रम उनके शत्रुओं पर उसी प्रकार प्रभावी है जैसे—
1. हवा का बादलों पर,
2.
भगवान शिव का रति के पति कामदेव पर,
3.
परशुराम का सहस्रबाहु पर।

इन उदाहरणों से कवि यह बताना चाहते हैं कि शिवाजी मलेच्छ (विदेशी आक्रांताओं) पर पूरी तरह हावी हैं, जैसे इन शक्तिशाली देवताओं ने अपने-अपने शत्रुओं को परास्त किया था।

दावा द्रुम-दंड पर, चीता मृग-झुंड पर,
भूषन बितुंड पर, जैसे मृगराज है।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में छत्रपति शिवाजी के अद्भुत पराक्रम का वर्णन करते हुए कहते हैं कि शिवाजी अपने शत्रुओं पर उसी प्रकार शासन करते हैं जैसे—
1.
जंगल की आग पेड़ों की डालियों पर,
2.
चीता हिरणों के झुंड पर,
3.
सिंह हाथी पर।

इन उदाहरणों से कवि यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि शिवाजी का पराक्रम अजेय है। वे अपने शत्रुओं पर उसी तरह हावी हैं जैसे ये शक्तिशाली प्राकृतिक शक्तियाँ अपने-अपने क्षेत्र में प्रबल होती हैं।

तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर,
यौ मलेच्छ बंस पर, सेर सिवराज है।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में छत्रपति शिवाजी के शौर्य की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि शिवाजी का मलेच्छों (विदेशी आक्रांताओं) पर उसी तरह प्रभाव है जैसे—
1.
प्रकाश का अंधकार पर,
2.
भगवान कृष्ण का कंस पर।

इन उदाहरणों से कवि यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि शिवाजी अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध एक महान योद्धा हैं। जैसे प्रकाश अंधकार को मिटा देता है और कृष्ण ने अत्याचारी कंस का अंत किया था, वैसे ही शिवाजी मलेच्छ आक्रांताओं का नाश कर रहे हैं।

(2)

निकसत म्यान ते मयूखैं, प्रलै-भानु कैसी
फारै तम-तोम से, गयंदन के जाल को।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में महाराज छत्रसाल की वीरता और पराक्रम का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जब उनकी तलवार म्यान से बाहर निकलती है, तो वह प्रलयकालीन सूर्य की किरणों के समान प्रतीत होती है।

जिस प्रकार सूर्य की किरणें घने अंधकार को चीरकर प्रकाश फैलाती हैं, उसी प्रकार छत्रसाल की तलवार शत्रुओं के हाथियों की पंक्तियों को नष्ट कर देती है। यहाँ उनकी तलवार को शक्ति और प्रकाश का प्रतीक बताया गया है, जो अंधकार रूपी शत्रुओं का अंत करती है।

लागति लपकि कंठ बैरिन के नागिनि सी,
रुद्रहि रिझावै दै दै मुंडन की माल को।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में महाराज छत्रसाल की अद्भुत वीरता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उनकी तलवार इतनी तीव्र है कि वह शत्रुओं की गर्दन पर इस तरह लिपट जाती है जैसे कोई नागिन अपने शिकार को जकड़ लेती है।
इसके अलावा, उनकी तलवार शिव (रुद्र) को प्रसन्न करने के लिए शत्रुओं के कटे हुए सिरों की माला अर्पित कर रही है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान शिव के गले में मुंडमाला होती है। इस पंक्ति में छत्रसाल की तलवार के प्रचंड पराक्रम को प्रदर्शित किया गया है, जो उनके शत्रुओं का संहार करके भगवान शिव को अर्पित कर रही है।

लाल छितिपाल छत्रसाल महाबाह बली,
कहाँ लौं बखान करौ तेरी करवाल को।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में महाराज छत्रसाल की वीरता और पराक्रम का गुणगान करते हुए कहते हैं कि हे शक्तिशाली और विशाल भुजाओं वाले छत्रसाल! आपकी तलवार की महिमा का मैं कहाँ तक वर्णन कर सकता हूँ?

आपकी तलवार इतनी प्रलयंकारी है कि वह शत्रुओं के समूह का संहार कर रही है। यह केवल एक हथियार नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र में विनाश का प्रतीक बन चुकी है। कवि यहाँ छत्रसाल की तलवार को अतुलनीय बताते हुए उसकी अपार शक्ति का वर्णन कर रहे हैं।

प्रतिभट कटक कटीले केते काटि काटि,
कालिका सी किलकि कलेऊ देति काल को।

भावार्थ - कवि भूषण इन पंक्तियों में महाराज छत्रसाल की वीरता और युद्धकौशल का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उनकी तलवार शत्रुसेनाओं का संहार लगातार करती जा रही है।

यह संहार इतना भयानक है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह माता काली को प्रसन्न करने के लिए युद्धभूमि में बलि का प्रसाद अर्पित कर रही हो। यहाँ कवि ने छत्रसाल की तलवार की प्रलयंकारी शक्ति को माँ काली के रौद्र रूप से तुलना करते हुए बताया है कि वह शत्रुओं के लिए यमराज समान विनाशकारी सिद्ध हो रही है।

KAVITT OBJECTIVE QUESTION

    1.      भूषण का जन्म कब हुआ था ?
a) 1610 ई .          
b) 1613 ई .
c) 1618 ई .          
d) 1617

     2.      भूषण की लिखी कविता कौन सी है?
a)पद         
b)छप्पय
c)कवित्त             
d)पुत्र वियोग

     3.      भूषण को ' भूषण ' उपाधि किसने दी थी ?
a) महाराज छत्रसाल ने   
b) छत्रपति शिवाजी ने
c) औरंगजेब ने        
d) राजा रुद्रसाह ने

     4.      भूषण के दो नायक कौन कौन थे?
a)शिवाजी और छत्रसाल
b)नंद और शकातर
c)चन्द्रगुप्त और चाणक्य
d)इनमे से कोइ नहीं 

     5.      सहस्रबाहु पर किसका आक्रमण हुआ था ?
a) श्री राम का         
b) रावण का
c)) परशुराम का        
d) शिवाजी का

     6.      छत्रसाल की तलवार किसके जाल को फाड़ रही है?
a) शत्रुओं के जाल को   
b) गर्यक्ष के जाल को
c) सिंह के जाल को     
d) किसी को भी नहीं

     7.      शिवराजभूषण कृति किसकी है?
a)देव         
b)बिहारी
c)भूषण       
d)मतिराम  

     8.      कृष्ण ने किस पर आक्रमण किया था?
a) रावण पर          
b) सहस्रबाहु पर
c) कंस पर           
d) महेन्द्र पर

     9.      भूषण ने मुख्यतः किस भाषा में रचना की है?
a)उर्दू         
b)हिंदी
c)ब्रज        
d)अवधी 

     10.   इनमें से कौन भूषण का आश्रयदाता था ?
a) रुद्रसाह            
b) जयसिंह
c) शिवाजी            
d) बाबर

     11.   कवि भूषण का प्रथम कवित्त किस ऐतिहासिक पुरुष से सम्बन्धित है?
(a) तुलसीदास         
b) शिवाजी
c) राणा रणजीत सिंह   
d)जयशंकर प्रसाद

     12.   भूषण की धारा के कवि है ?
a)रीतिमुक्त           
b)रीती सिद्ध
C)रीतिबद्ध           
d)इनमे से कोई नहीं

     13.   भूषण के कितने भाई थे?
a)2                                       
b)3
c)4                                       
d)5

     14.   शिवाजी की वीरता का बखान किस कृति में भूषण ने किया है?
a)भूषण हजारा        
b)छत्रसाल-दशक
c)शिव बवानी         
d)भूषण उल्लास

     15.   भूषण ने समुद्रगिन से किसकी तुलना की है?
a)छत्रसाल            
b)शिवाजी
c)कृष्ण भगवन        
d)इनमे से कोई नहीं

    16.   महाकाल भूषण हिंदी साहित्य के लिए किस काल के कवि थे?
a)रीतिकाल           
b)बितिकाल
c)सितिकाल           
d)जितिकाल

ANSWER
1.b 2.c 3.d 4.a 5.c 6.b 7.c 8.c 9.c 10.c 11.b 12.a 13.a 14.c 15.b 16.a 

KAVITT  QUESTION ANSWER

     1.      शिवाजी की तुलना भूषण ने किन-किन से की है?
उत्तर: भूषण ने शिवाजी की तुलना इंद्र, समुद्र की अग्नि, भगवान राम, पवन, शिव, परशुराम, जंगल की आग, चीता, मृगराज, तेज प्रकाश और कृष्ण से की है। वे इन शक्तिशाली प्रतीकों की तरह पराक्रमी, अजेय और वीर योद्धा थे।

     2.      शिवाजी की तुलना भूषण ने मृगराज से क्यों की है?
उत्तर: मृगराज (सिंह) अकेला होते हुए भी जंगल का राजा होता है और हाथी तक को हरा देता है। इसी तरह, शिवाजी भी वीर, रण-कुशल और अपराजित योद्धा थे। वे हमेशा विजयी रहते थे और उनकी शक्ति के सामने शत्रु टिक नहीं पाते थे।

     3.      छत्रसाल की तलवार कैसी है? वर्णन कीजिए।
उत्तर: छत्रसाल की तलवार सूर्य की किरणों की तरह तेज और विनाशकारी है। यह शत्रुओं के दल को पलभर में समाप्त कर देती है। यह नागिन की तरह शत्रु के गले में लिपटकर उसे मौत के घाट उतार देती है और युद्धभूमि में कटे सिरों की माला बना देती है।

     4.      भूषण रीतिकाल की किस धारा के कवि हैं? वे अन्य रीतिकालीन कवियों से कैसे विशिष्ट हैं?
उत्तर: भूषण रीतिकाल के रीति-सिद्ध कवि हैं, लेकिन उन्होंने शृंगार रस के बजाय वीर रस को प्रमुखता दी। अन्य रीतिकालीन कवियों की तरह उन्होंने प्रेम और सौंदर्य का वर्णन नहीं किया, बल्कि अपनी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति और वीरता को दर्शाया।

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